Thursday, 6 August 2015

राजपूत वास्तुकला



राजपूत शासक खूबसूरत मंदिरों, किलों और महलों के निर्माण के सन्दर्भ में एक गहरी अंतर्दृष्टि रखते थे.
राजपूतों द्वारा मंदिर का निर्माण
600 ईस्वी से 900 ईस्वी के आस-पास राजपूत शासकों नें विविध मंदिरों का निर्माण कार्य करवाया था. इनमें प्रमुख था एलोरा का कैलाश मंदिर, महाबलीपुरम के रथ मंदिर और एलिफेंटा के गुफाएं.   
इसी तरह 900 ईस्वी से 1200 ईस्वी के बीच भी राजपूत शासकों के द्वारा पल्लव, चोल और होयसल मंदिरों का निर्माण कार्य किया गया. साथ ही कंदरिया का महादेव मंदिर, भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर, कोणार्क का सूर्य मंदिर, खजुराहो मंदिर आदि की भी निर्माण किया गया. इस सूची में माउंट आबू का तेजपाल मंदिर और पूरी का जगन्नाथ मंदिर भी शामिल है. इन सारे मंदिरों की एक सबसे बड़ी विशेषता है इनकी सुन्दरता, इनकी बनावट और इनपर की जाने वाली कढाई. जैसे इन मंदिरों में गुलाबी और पीले रंग के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. इन मंदिरों की एक और विशेषता हैं और वह है इनकी खिड़कियाँ. इन मंदिरों के द्वारों और खिडकियों और खम्बो पर ढेर सारे फूलो से कढ़ाईयां की गयी हैं. इन पर इसके अलावा बहुत सारे अनेक चित्रों को भी विकसित किया गया है, जैसे परियां की कथाएँ, आत्मायें आदि.
विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कार्य 1002 ईस्वी में, एक चंदेल राजा धंग द्वारा करवाया गया. ने बनवाया था. खजुराहो का कंदरिया मंदिर इन सबमें सबसे बड़ा स्मारक है जिसका निर्माण कार्य 1017 ईसवी से 1029 ईसवी के बीच किया गया था.बनाया गया था.
950-70 ईस्वी के दौरान निर्मित पार्श्वनाथ मंदिर खजुराहो के मंदिरों की सूची में सबसे बडे जैन मंदिरों में से एक था. इस मंदिर का आकार आयताकार है. इसके अलावा मंदिरों के शहर पालिताना में श्री ऋषभ देव का मंदिर और चौमुख मंदिर स्थित हैं.
1088 ईस्वी में, दिलवाड़ा का जैन मंदिर सफेद संगमरमर से निर्मित किया गया था. इस मंदिर में एक कक्ष में स्थित देवता को उचें मंच पर विराजमान दिखाया गया है जिसके चारो तरफ एक आंगन है. इसके अलावा विमलवसही मंदिर और तेजपाल मंदिर भी प्रमुख मंदिर हैं.
राजपूतों द्वारा निर्मित किला और महल
राजपूतों शासकों नें चित्तौड़गढ़, अम्बर (जयपुर), जैसलमेर, जोधपुर, रणथम्भौर, ग्वालियर, और कई अन्य स्थानों पर महत्वपूर्ण किले का निर्माण किया था. यह ध्यान देने वाली बात हैं की इन सभी किलों का निर्माण छोटी पहाड़ियों पर किया गया है साथ ही इन किलों में कोई अन्य लोग प्रवेश न कर सके इसके लिए उसे चहारदीवारी से घेरा भी गया है. इन किलों में दीवारें और अनेक टावर आदि बने होते थे.
चित्तौड़गढ़ किला भारत के सभी किलों में सबसे अधिक विशाल किला है. इस किले का निर्माण कार्य मौर्य शासकों के द्वारा 7 वीं शताब्दी में करवाया गया था. इस किले में साथ दरवाजे बने हुए हैं. इसके अलावा इस किले में कई स्मारक भी बने हुए हैं. जैसे कीर्ति स्तम्भ, प्रकाश स्तम्भ,विजय स्तम्भ आदि. इन सभी स्मारकों में सबसे महत्वपूर्ण स्मारक विजय स्मारक है जिसे टावर आफ़ विक्ट्री भी कहा जाता है. इसका निर्माण चितौड़ में किया गया है. इस स्मारक में 9 तल्ले बने हुए हैं और इसकी ऊंचाई 37 मीटर है. इस टावर की दीवारों पर हिन्दू देवी-देवताओं के ढेर सारी चित्रलिपियाँ बनाई गयी हैं. इस स्तम्भ को चितौड़ के राजा महाराजा कुम्भा ने मालवा के शासक महमूद पर विजय की स्मृति में 13 वीं शताब्दी में बनवाया था. इस स्तम्भ का iआकर वर्गाकार हैं जिसमें चारो तरफ छज्जे और खिड़कियाँ बनी हुई हैं.
जैसलमेर किले का निर्माण कार्य भाटी राजपूत शासक राव जैसल द्वारा 1156 ईस्वी में जैसलमेर में करवाया गया था. यह किला थार रेगिस्थान में त्रिकुटा चोटी पर अवस्थित है.
उदयपुर पैलेस महाराणा उदय सिंह  द्वारा निर्मित पिछोला झील के तट पर स्थित है. जयपुर में हवा महल  राजा जय सिंह द्वारा बनवाया गया था. उनकी वास्तुकला में दर्पण और सजावटी संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है. इन पर छोटे-छोटे चित्रों के साथ काफी कारीगरी की गयी है.

3 comments: